Tuesday, April 15, 2008
Saturday, March 15, 2008
Friday, January 25, 2008
युरोप मे पैसा कमाने के चक्कर मे मत लूटो
आज मे एक एसे लडके से मिला जो कुछ दिन पहले भारत से यूरोप (जर्मन )आया था! आया क्या एजेंट छोड गया
उस को!! परमजीत सिह नाम का ये नोजवान पंजाब के किसी गाव् का हें ? पुछ्ने पर उस ने जो आपबीती सुनाई
वो काबीलेगोर हें ! दाद देनी पडेगी एसे कबुतरबाजो को जो नई-नई ईजाद पेदा करते हें युवकों को यूरोप भेजने के लिये! उस परमजीत नामक युवक ने बताया की वो ( भारतिये मुद्रा मे ) सात लाख रुपया एजेंट को दे कर दो महीने
बाद जर्मन पहुचा ! उस ने भारत से जर्मन पहुचने तक की जो स्टोरी सुनाई वो इस प्रकार हें !रवि गुप्ता नाम का एजेंट
जो दिल्ली का हें ,से मिला था और सात लाख रुपये मे जर्मन पहुचाने की बात हुई ( मेरे गाव के कुछ लडके पहले भी
इसी तरह गये हें) उस एजेंट ने सात लाख रुपये,पासपोर्ट,और पाच फोटो ले कर दस दिन के बाद आने को कहा
लेकिन एक सप्ताहा बाद ही एजेंट का फोन आ गया की जल्दी ही कपड़े ले कर दिल्ली आ जाओ !
दिल्ली पहुचने पर पता चला की चार और लड़के भी साथ जा रहे हें हमारा एक सात लोगो का ग्रुप बनगया था?
जिस मे एजेंट और उस का एक सहायक ओर बाकी हम पाच लडके हम सब को एक न्युज चेनल के
आई-कार्ड बने हुये दिये गये जिन पर हमारा नाम लिखा था! और कुछ दिनो की ट्रेनिग जिस मे हमे सिखाया ओर
समझाया गया कि हम टी.वी.चेनल के लिये डाक्युमेन्ट्री फ़िल्मे बनाते हें ! एजेंट ने बताया कि सब से पहले हमे
बेकाक़ ( थाईलेंड ) जाना हें हमारा वीसा और टिकट तेयार होगया ! अगले दिन हम बेकाक़ (थाईलेंड) भी
पहुच गये ! दो दिन हम घुमे-फ़िरे और हमारे एजेंट ने कुछ कैमरे से फ़िल्म भी बनाई ! और जिस बात ने हमे
बहुत परेशान किया वो थी अगले रोज पोलेंड एम्बेसी मे जा कर पोलेंड का वीसा लेने के लिये !जिस कारण
हम पाचों लडके सो नही सके !क्योकि हमे पोलेन्ड जाने का कारण बताना था !वो कारण ही हमारी समस्या थी
हमे बताना था की हम उन लोगो पर डाक्युमेन्ट्री फ़िल्म बना रहे हें जो अवैध रुप से पोलेंड के रास्ते जर्मन घूसते
हें जब कि हम खुद अवैध रुप से युरोप जा रहे थे !हमे बताया गया था की पोलेंड पहुचते ही हमे जंगल के रास्ते जर्मन पहुचना हे ! हम कुछ नही कर सकते थे, क्योकि पैसे तो हम पहले ही दे चुके थे ! किसी तरह पोलेंड का
वीसा भी मिल गया !मन मे खुशी भी ओर डर भी लगा हुआ था! तीसरे रोज हम पोलेंड भी पहुच गये यहा आ कर देखा तो हमारे जेसे बहुत से लोग इन एजेंटों के चगूल मे फ़से हुये हें !कुछ दिन रुकने पर एक रात को हम सब को
अलग-अलग ग्रुपो मे बाट कर जंगल के रास्ते जर्मन पहुचा दिया गया ! यहा पर भी अभी काम नही मिल रहा
यह व्यथा सुना कर परमजीत भावुक हो गया ! इस जेसे कितने ही परमजीत इन माफ़िया एजेंटों के हाथों
युरोप आने के चक्कर मे अपना घर लुटा रहे हें ? अब तो युरोप मे भी बहुत कडे नियम लागू हो गये हें !एसी हालत
मे अगर पुलिस के हाथ लग गये तो सजा भुगतने के साथ ही वापिस अपने देश भेज देते हे !एजेंटों को जो पैसे दिये
वो अलग साथ सजा भुगतो अलग?
Friday, January 18, 2008
माँ ....
मां
अपने सपनों के लिये "
भुल गया मां तेरे सपने ’
याद कर जब तेरी गोद मे ’
छिप कर चुरी खाता था ’
जब तंग करता रोता था’
मीठी लोरी सुनाती थी ’
चन्दा मामा,तारे प्यारे ’
सब को जमी पर बुलाती थी’
मुझको पालने के लिय ‘ मां ’
कितने दुःख उठाती थी ’
नही चुका सकता मे ’
तेरा कर्ज अगर मे लू ’
जन्म-दर-जन्म क्योकि ’
जिस कर्ज को नही चुका सका भगवान’
हम तो ठहरे मामूली इनसान’
मेरी जिन्दगी की पहली कविता जो सात समुन्दर पार "मां" से बहुत दुर बैठ कर लिखी क्योकि "मां " को मिले
चार साल हो गे " हर बार मां को झूठा दिलासा दे कर मिलने का वादा कर के भी नही जा सका ! परदेस मे काम
के चक्कर मे एसा फसा की समय नही मिल पा रहा मां के पास जाने को बस मन मे छिपी भडास यहा ब्लोग पर
निकाल दी
Saturday, December 22, 2007
ये बिना लाग लपेट वाले
मेरा सभी भधास भाइयों को नमस्कार बलोगावाणी पर(बिना लाग लपेट के.......वो ही सच हे)पर लिखा की कोई भी हिन्दी ब्लओगर ..क्रिसमिस ओर नये साल के शुभ संदेश ना लिखे अगर किसी ने इस का आदान परदान किया तो उसे हिन्दी बलोग़ समाज से बाहर समझा जायेगा क्यो कि यह अग्रेजो की देन हे.मेरे भोले भाई अगरेजो की दी हुई कोन कोन सी चीज का त्याग करे गा जिस कंप्यूटर पर लिख रहा हे अग्रेजो कि देन हे टी. वी देखता हे अग्रेजो कि देन हे ओर बिमारी से बचने के लिय अग्रेजी दवाईया खाता होगा किस किस का त्याग करे गा भारत का साविधान भी अग्रेजो से प्रभावित हे क्या इसे बदल सकते हो अगर किसी का सम्मान नही कर सकते तो उस का अपमान भी ना करो इसी मे ही समाज का भला हे प्यार बाटों जहर नही
Thursday, November 29, 2007
Bharat Ki Beti
Aaj Awinash ji ke blog Mohalla par ek masum si bharty beti ko nagan dekh kar sir sharm se jhuk gya .Apne aap ko sabhy samaj ka batane wala bharat aaj apne hi hatho naga ho gya .Manwta mar gi samaj apahij ho gya adhunik Dushashno ne fhir se daropti ka chir harn kardia waha khade police wale aor media wale tamashabino ki tarhe sabkuchh dekhte rhe aor uus masum ladki ko kisi ne bhi nahi bachhaya .Kya fhir se uus ladki ko samaj us ka man saman wapis kar sakta he .esi ghatna ko dekh kar lagta he das sal pehle bharat ko chhod kar koi galti nahi ki kam se kam yaha europ me sakun to he