शनिवार, 5 मार्च 2011

सिर्फ 5 घोटालों में लुट गया साल भर का आधा सरकारी खर्च

वित्‍त मंत्री प्रणव मुखर्जी साल 2011-2012 का बजट पेश करने की तैयारी में जी-जान से जुटे हैं। वह बताएंगे कि एक साल में सरकार कितना खर्च करेगी और उसे कितनी आमदनी होगी। पूरी उम्‍मीद है कि हर बार की तरह इस बार भी आमदनी से ज्‍यादा खर्च का ही अनुमान होगा। इस साल भी यही हुआ है और राजकोषीय घाटा (सरकार के खर्च-आमदनी का अंतर) करीब 3.८० लाख करोड़ रुपये है। पर इसमें भ्रष्‍टाचारियों की बहुत बड़ी भूमिका है।

देश में पिछले एक साल में सामने आए पांच बड़े घोटालों में सरकारी खजाने को जितने का चूना लगा है, वह दो साल का राजकोषीय घाटा पाटने के लिए काफी है। इन घोटालों में करीब पांच (4.82) लाख करोड़ रुपये की चपत लगी है। यह रकम कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष २०१०-११ के लिए भारत का सालाना खर्च 11.8 लाख करोड़ रुपये है। घोटाले में गंवाई गई रकम इसके आधे से थोड़ी ही कम है।

गौरतलब है कि देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्‍पाद, जिसके आधार पर विकास दर तय होती है) करीब ५५ लाख करोड़ रुपये है। इस रकम का 10 फीसदी केवल उन चंद लोगों की जेब में पहुंच गया, जिन्‍होंने ये 5 बड़े घोटाले किए।

देश को क्‍या नुकसान

इन घोटालों के चलते जनता को हुए नुकसान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष २०१०-११ के लिए सर्व शिक्षा अभियान का बजट सिर्फ 15,000 करोड़ रुपये है। ग्रामीण इलाकों में हर हाथ को काम देने की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा के लिए 40,100 करोड़ रुपये, देश की बाहरी दुश्मनों से हिफाजत के लिए रक्षा बजट 1,47,344 करोड़ रुपये और स्कूलों में दोपहर के भोजन के लिए 9,300 करोड़ रुपये की रकम तय की गई थी। साफ है कि घोटाले में खोयी गई रकम से इन सभी योजनाओं को कई सालों तक चलाया जा सकता है।

सिर्फ २ जी घोटाले की रकम 1.76 लाख करोड़ रुपये से देश में क्या-क्या हो सकता है

१. दिल्ली-मुंबई-चेन्नई और कोलकाता को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क योजना में लगने वाले खर्च की चार गुना है यह रकम।
२. इतनी रकम में 30 लाख बसें खरीदी जा सकती हैं
३. नागार्जुन सागर जैसे करीब 1868 बांध बनाए जा सकते हैं।
४. 25 लाख नर्सिंग होम स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे देश के करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं।
५. 30 लाख स्कूलों का निर्माण किया जा सकता है, जिससे हमारी साक्षरता दर 65 फीसदी से बढ़कर काफी ज़्यादा हो सकती है।
६. 35 करोड़ कंप्यूटर खरीदे जा सकते हैं, जिससे भारत दुनिया की आईटी राजधानी बन सकता है।
७.504 फाइटर जेट्स खरीदे जा सकते हैं, जिससे भारत का रक्षा तंत्र मजबूत हो सकता है।इन 5 घोटालों में गए 5 लाख करोड़

कॉमनवेल्थ खेल आयोजन: भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन ने 2003 में जब कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन का अधिकार हासिल किया था, तब एसोसिएशन ने 1,620 करोड़ रुपये के बजट खर्च का अंदाजा लगाया था। लेकिन 2010 तक आते-आते यह बजट करीब 11,500 करोड़ तक पहुंच गया। इसमें दिल्ली के विकास और सौंदर्यीकरण का बजट शामिल नहीं है। जानकार मानते हैं कि इस खेल के आयोजन और इससे जुड़े सौंदर्यीकरण पर करीब 70 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसमें दिल्ली में होने वाले विकास कार्य भी शामिल हैं। माना जाता है कि इस राशि में ज़्यादातर रकम घपले-घोटाले की भेंट चढ़ गई। इस मामले में जांच अब भी जारी है।

2 जी घोटाला : पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर आरोप है कि उन्होंने कम दाम पर 2 जी स्पेक्ट्रम का आवंटन कर सरकारी खजाने को करीब 1.76 लाख करोड़ रुपये की चपत लगाई है। यह रकम सीएजी के आकलन पर आधारित है।

एस बैंड स्पेक्ट्रम आवंटन: एस बैंड स्पेक्ट्रम के आवंटन में सरकार को करीब 2 लाख करोड़ रुपये का चूना लगने का अंदाजा है। यह भी सीएजी का आकलन है। इस मामले में सीएजी की रिपोर्ट पूरी नहीं हुई है। हालांकि, सरकार पिछले साल जुलाई में ही एस बैंड स्पेक्ट्रम के आवंटन रद्द करने का फैसला कर चुकी है। अभी समझौता आधिकारिक तौर पर रद्द नहीं हुआ है। यही दलील देकर सरकार घोटाले के आरोपों से बच भी रही है।

आदर्श हाउसिंग घोटाला: कारगिल शहीदों के नाम पर मुंबई के कोलाबा के पॉश इलाके में सोसाइटी के नाम पर जमीन आवंटित कराने के बाद करीब ३१ मंजिला इमारत खड़ी की गई। इसमें करीब १०३ सदस्य हैं। एक फ्लैट की खुले बाज़ार में औसत कीमत करीब ६ से ८.५ करोड़ है। इसे करीब दस फीसदी कीमत देकर करीब ६० से ८५ लाख रुपये में बुक कराया गया। इस तरह से पूरी इमारत की कीमत करीब ९.५ अरब रुपये के आसपास है, लेकिन इसके लिए महज ६० से ८५ करोड़ रुपये ही चुकाए गए। इस तरह ज़मीन के गलत इस्तेमाल के अलावा बाजार दर पर आवंटियों ने करीब ९ अरब रुपये का फायदा उठाया।

खाद्यान्न घोटाला: उत्तर प्रदेश में करीब 35,000 करोड़ रुपये का खाद्यान्न घोटाला २०१० में उजागर हुआ। दरअसल, यह अंत्योदय, अन्नपूर्णा और मिड डे मील जैसी खाद्य योजनाओं के तहत आने वाले अनाज को बेचने का है। यह घोटाला 2001 से 2007 के बीच हुआ था। राज्‍य में इन योजनाओं के तहत आवंटित चावल की भी कालाबाजारी की गई। कुछ अनुमानों के मुता‍बिक इस तरह 2 लाख करोड़ रुपये के वारे-न्‍यारे करने का आरोप है
Source: dainikbhaskar

शनिवार, 27 नवंबर 2010

भारत रत्न पुरस्का्र देदो भाई

बाजार से घर का सामान लाने के लिये जेसे ही निकला की देखा चोक मे कुछ लोगो का हजुम रास्ता रोके जोर-जोर नारे लगा रहा हें? हमारी मागे पुरी करो ?समय की पुकार हें ,आरक्षण हमारा अधिकार हें? तभी देखा की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मुर्ति के पास खडा मोटा काला खददरधारी नेता टाईप व्यक्ति भाषण दे रहा हें ? और मांग कर रहा हें की पिछडे वर्ग को भारत रत्न पुरस्कार मे पचास प्रतिशत आरक्षण दो ? जेसे तेसे भीड को चीरता हुआ बाजार से सामान ले कर घर पहुचा टी.वी पर आखों देखा हाल बताया जा रहा हें !देश मे जगह-जगह आंदोलन हों रहे हें !
सभी जाति धर्मो वाले भारत रत्न पुरस्कार मे अपने हिसे का आरक्षण लेना चाहाते हें !और इधर हमारी पत्नी जी खाना बनाने के साथ-साथ मुह ही मुह बडबडा रही हें , हम ने भी पुछ ही लिया डरते-डरते क्या हुआ जी ! तपाक से बोली
इस बार भारत रत्न पुरस्कार जरुर किसी महिला को मिलना चाहिये! क्यो भई एसा क्या कर दिया महिलाओ ने!
हा..हा..सब मर्द ही करते हे जेसे की महिलाओ का कोई योगदान ही नही हे! हम भी नारी शक्ति सघर्ष समिति की कल होने वाली मिटिग मे यह मुद्दा उठाये गे. ओर महिलाओ के लिये भारत रत्न पुरस्कार मे आरक्षण ले कर रहेगे?
मेने खाने की इन्तजार मे भुखे बेठे बच्चो की तरफ़ देखा! ओर धीमी आवाज मे बीवी से कहा भाड मे जाये ये पुरस्कार पहले अपने रत्नो को खाना तो खिलाओ ?ओर हाथ लगते टी.वी बन्द कर दिया
गुलशन खट्टर

इन्डिया मे गरीब भारत

मै हरियाणा का रहने वाला हू और पिछले दस सालों से यूरोप मे अपना स्थाई निवास बना रखा हें. सुबह की सुरूआत सारी हिन्दी अखबारों की ख़बरे पढ़ कर करता हू और जिस बात पर भारत मे ज्यादा बहस होती हें .वो हे गरीबी.

इतने विशाल ओर भू:संसाधनों से संपन भारत मे गरीबी क्यो हें ?इस का ऊतर होगा शायद भ्रष्टाचार . लेकिन ये भ्रष्टाचार किस की देन हे .राजनेताओं की, नोकरशाओ की, या आम जनता की जो हर पाच साल बाद वोट रुपी ढपा
लगा कर अपनी किस्मत उन नेताओ के हवाले कर देते हें जो हर बार गरीबी हटाएगे जेसे सपने दिखा कर गरीबी हटाने की जगह गरीबो को हटा रहे हें .कभी सुना हे की सांसदों का शाही खर्चा कम करने का बिल पास हुआ हो .जब तक पार्टियाँ सता मे रहती हें उन्हे गरीबी दिखाइ नही देती सता छि्नते ही उन के लिये गरीबी एक भयानक मुद्दा बन जाता हें,सारी कमियाँ इस भोली-भाली जनता की ही हें .जो हर बार इन राक्षस रुपी नेताओ के चगुल मे फस कर जात-पात और धर्म के नाम पर एक दुसरे को मारते काटते हें .जब तक जनता अपनी किस्मत भ्रष्ट नेताओ के हाथो सोपती रहे गी तब तक जनता को गरीबी मे ही जिना पडेगा .मुठी भर अमीरो से सारा भारत अमीर नही बन जाता .फ़िर अमीर तो बना ही गरीबो का खुन चुसने के लिये हें माफ़ करना मे लेखक नही हू जो दिल मे आया लिख दिया
गुलशन खट्टर

सोमवार, 28 दिसंबर 2009

संसद के सदस्य को मिलने वाला वेतन एवं सुविधायें

कल एक मेल प्राप्त हुआ जिसके अनुसार एक संसद सदस्य को मिलने वाला वेतन और सुविधायें निम्नलिखित हैं:

मासिक वेतन : 12,000 Rs.
Expense for Constitution per month : 10,000 Rs.
कार्यालय के लिये प्रति माह खर्चा : 14,000 Rs.
Traveling concession (Rs. 8 per km) : 48,000 (For a visit to Delhi & return:6000 km)
दैनिक भत्ता संसद की बैठक के दौरान : 500 Rs.
Charge for 1 class (A/C) in train : Free (For any number of times) (All over India)
Charge for Business Class in flights : Free for 40 trips / year (With Wife or P.A.)
Rent for MP hostel at Delhi : Free
बिजली की सुविधा : Free up to 50,000 units
फोन सुविधा : Free up to 170,000 calls।

एक संसद सदस्य पर कुल खर्चा (प्रति वर्ष ) : 3,200,000 (32 लाख रुपये)
पाँच वर्ष के लिए एक संसद सदस्य पर कुल खर्चा : 16,000,000 (1 करोड़ साठ लाख रुपये)


534 संसद सदस्य पर 5 वर्ष के लिए कुल खर्चा : Rs. 8,544,000,000 (nearly 855 cores)


शनिवार, 15 मार्च 2008

Rahat Fateh Ali Khan - Maa part 1

शुक्रवार, 25 जनवरी 2008

युरोप मे पैसा कमाने के चक्कर मे मत लूटो

आज मे एक एसे लडके से मिला जो कुछ दिन पहले भारत से यूरोप (जर्मन )आया था! आया क्या एजेंट छोड गया
उस को!! परमजीत सिह नाम का ये नोजवान पंजाब के किसी गाव् का हें ? पुछ्ने पर उस ने जो आपबीती सुनाई
वो काबीलेगोर हें ! दाद देनी पडेगी एसे कबुतरबाजो को जो नई-नई ईजाद पेदा करते हें युवकों को यूरोप भेजने के लिये! उस परमजीत नामक युवक ने बताया की वो ( भारतिये मुद्रा मे ) सात लाख रुपया एजेंट को दे कर दो महीने
बाद जर्मन पहुचा ! उस ने भारत से जर्मन पहुचने तक की जो स्टोरी सुनाई वो इस प्रकार हें !रवि गुप्ता नाम का एजेंट
जो दिल्ली का हें ,से मिला था और सात लाख रुपये मे जर्मन पहुचाने की बात हुई ( मेरे गाव के कुछ लडके पहले भी
इसी तरह गये हें) उस एजेंट ने सात लाख रुपये,पासपोर्ट,और पाच फोटो ले कर दस दिन के बाद आने को कहा
लेकिन एक सप्ताहा बाद ही एजेंट का फोन आ गया की जल्दी ही कपड़े ले कर दिल्ली आ जाओ !
दिल्ली पहुचने पर पता चला की चार और लड़के भी साथ जा रहे हें हमारा एक सात लोगो का ग्रुप बनगया था?
जिस मे एजेंट और उस का एक सहायक ओर बाकी हम पाच लडके हम सब को एक न्युज चेनल के
आई-कार्ड बने हुये दिये गये जिन पर हमारा नाम लिखा था! और कुछ दिनो की ट्रेनिग जिस मे हमे सिखाया ओर
समझाया गया कि हम टी.वी.चेनल के लिये डाक्युमेन्ट्री फ़िल्मे बनाते हें ! एजेंट ने बताया कि सब से पहले हमे
बेकाक़ ( थाईलेंड ) जाना हें हमारा वीसा और टिकट तेयार होगया ! अगले दिन हम बेकाक़ (थाईलेंड) भी
पहुच गये ! दो दिन हम घुमे-फ़िरे और हमारे एजेंट ने कुछ कैमरे से फ़िल्म भी बनाई ! और जिस बात ने हमे
बहुत परेशान किया वो थी अगले रोज पोलेंड एम्बेसी मे जा कर पोलेंड का वीसा लेने के लिये !जिस कारण
हम पाचों लडके सो नही सके !क्योकि हमे पोलेन्ड जाने का कारण बताना था !वो कारण ही हमारी समस्या थी
हमे बताना था की हम उन लोगो पर डाक्युमेन्ट्री फ़िल्म बना रहे हें जो अवैध रुप से पोलेंड के रास्ते जर्मन घूसते
हें जब कि हम खुद अवैध रुप से युरोप जा रहे थे !हमे बताया गया था की पोलेंड पहुचते ही हमे जंगल के रास्ते जर्मन पहुचना हे ! हम कुछ नही कर सकते थे, क्योकि पैसे तो हम पहले ही दे चुके थे ! किसी तरह पोलेंड का
वीसा भी मिल गया !मन मे खुशी भी ओर डर भी लगा हुआ था! तीसरे रोज हम पोलेंड भी पहुच गये यहा आ कर देखा तो हमारे जेसे बहुत से लोग इन एजेंटों के चगूल मे फ़से हुये हें !कुछ दिन रुकने पर एक रात को हम सब को
अलग-अलग ग्रुपो मे बाट कर जंगल के रास्ते जर्मन पहुचा दिया गया ! यहा पर भी अभी काम नही मिल रहा
यह व्यथा सुना कर परमजीत भावुक हो गया ! इस जेसे कितने ही परमजीत इन माफ़िया एजेंटों के हाथों
युरोप आने के चक्कर मे अपना घर लुटा रहे हें ? अब तो युरोप मे भी बहुत कडे नियम लागू हो गये हें !एसी हालत
मे अगर पुलिस के हाथ लग गये तो सजा भुगतने के साथ ही वापिस अपने देश भेज देते हे !एजेंटों को जो पैसे दिये
वो अलग साथ सजा भुगतो अलग?

शुक्रवार, 18 जनवरी 2008

माँ ....



मां
अपने सपनों के लिये "
भुल गया मां तेरे सपने ’
याद कर जब तेरी गोद मे ’
छिप कर चुरी खाता था ’
जब तंग करता रोता था’
मीठी लोरी सुनाती थी ’
चन्दा मामा,तारे प्यारे ’
सब को जमी पर बुलाती थी’
मुझको पालने के लिय ‘ मां ’
कितने दुःख उठाती थी ’
नही चुका सकता मे ’
तेरा कर्ज अगर मे लू ’
जन्म-दर-जन्म क्योकि ’
जिस कर्ज को नही चुका सका भगवान’
हम तो ठहरे मामूली इनसान’
मेरी जिन्दगी की पहली कविता जो सात समुन्दर पार "मां" से बहुत दुर बैठ कर लिखी क्योकि "मां " को मिले
चार साल हो गे " हर बार मां को झूठा दिलासा दे कर मिलने का वादा कर के भी नही जा सका ! परदेस मे काम
के चक्कर मे एसा फसा की समय नही मिल पा रहा मां के पास जाने को बस मन मे छिपी भडास यहा ब्लोग पर
निकाल दी

शनिवार, 22 दिसंबर 2007

ये बिना लाग लपेट वाले

मेरा सभी भधास भाइयों को नमस्कार बलोगावाणी पर(बिना लाग लपेट के.......वो ही सच हे)पर लिखा की कोई भी हिन्दी ब्लओगर ..क्रिसमिस ओर नये साल के शुभ संदेश ना लिखे अगर किसी ने इस का आदान परदान किया तो उसे हिन्दी बलोग़ समाज से बाहर समझा जायेगा क्यो कि यह अग्रेजो की देन हे.मेरे भोले भाई अगरेजो की दी हुई कोन कोन सी चीज का त्याग करे गा जिस कंप्यूटर पर लिख रहा हे अग्रेजो कि देन हे टी. वी देखता हे अग्रेजो कि देन हे ओर बिमारी से बचने के लिय अग्रेजी दवाईया खाता होगा किस किस का त्याग करे गा भारत का साविधान भी अग्रेजो से प्रभावित हे क्या इसे बदल सकते हो अगर किसी का सम्मान नही कर सकते तो उस का अपमान भी ना करो इसी मे ही समाज का भला हे प्यार बाटों जहर नही

गुरुवार, 29 नवंबर 2007

Bharat Ki Beti

Aaj Awinash ji ke blog Mohalla par ek masum si bharty beti ko nagan dekh kar sir sharm se jhuk gya .Apne aap ko sabhy samaj ka batane wala bharat aaj apne hi hatho naga ho gya .Manwta mar gi samaj apahij ho gya adhunik Dushashno ne fhir se daropti ka chir harn kardia waha khade police wale aor media wale tamashabino ki tarhe sabkuchh dekhte rhe aor uus masum ladki ko kisi ne bhi nahi bachhaya .Kya fhir se uus ladki ko samaj us ka man saman wapis kar sakta he .esi ghatna ko dekh kar lagta he das sal pehle bharat ko chhod kar koi galti nahi ki kam se kam yaha europ me sakun to he

शुक्रवार, 23 नवंबर 2007

U.P me bomb visfot

Aaj jese hi internet khola to saab se pahle B.B.C hindi par jo khabar dekhi wo thi U.P me tin shehro me bomb phate jis se kai logo ke marne ki ashanka he aor us par hamare mannye garhe mantri ji ka kahna ki ugarwad par gabhirta se wichar karna padega kya bharat sarkar abhi tak ugarwad ko samany samjhti thi bharat sarkar kab ugarwad ke praty ghabhir hogi

गुरुवार, 22 नवंबर 2007

Aaj ka Media

Meri aor se sabhi blog likhne aor padhne walo ko namaskar mera wasta kabhi bhi Media se nahi pada lekin subaha ki suruat news padne aor sunne se hoti he aor jaha tak Media ka sawal he to bharat me akhbare aor T.V khabre kam aor vigypan jiyada dete he aor ese lagta he ki Media rajnetik partyo aor udyogik gharano ki chokidar baan gai he patarkar bhi wahi likhte he jo unke akka log chahte he aaj kuchh had tak patrkarita ki aad me eek dusre ko nicha dikhane ki koshish koi nhi chhodta